

ईक्कीसवीं सदी में
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में ,
शेरनी के अस्तित्व से
बाईसवीं सदी में
ईन्सान के सुखद
अस्तित्व की कल्पना
की जा सकती है।
( यह चित्र मेरी पुत्री एवं मेरे भतीजे ने जून २०१० में नेशनल पार्क में ली है )
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में ,
शेरनी के अस्तित्व से
बाईसवीं सदी में
ईन्सान के सुखद
अस्तित्व की कल्पना
की जा सकती है।
( यह चित्र मेरी पुत्री एवं मेरे भतीजे ने जून २०१० में नेशनल पार्क में ली है )

1 comment:
प्रकृति सभी जीव जंतुओं का सहअस्तित्व चाहती है ! हमें प्रकृति के मंतव्य से अनुकूलता स्थापित करनी ही होगी अन्यथा संतुलन का बिगाड़ हमारे स्वयं के बिगाड़ का कारण भी बन जाएगा !
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